अपनी सहमति के बिना जन्म दिए जाने पर माता-पिता को कोर्ट घसीटना चाहता है ये शख्स

अपनी सहमति के बिना जन्म दिए जाने पर माता-पिता को कोर्ट घसीटना चाहता है ये शख्स
असल में इस तरह का ग्रुप बच्चों को जन्म देना नैतिक रूप से गलत मानता है. पर इस बहस के बढ़ने से धरती पर इंसानों के अस्तित्व पर ही सवाल खड़ा हो सकता है.
नई दिल्ली: पिछले कुछ दिनों से सोशल मीडिया पर इंसानों के अस्तित्व पर ही सवालिया निशान लगाने वाली बहस छिड़ी हुई है. इस बहस की शुरुआत उस वक्त हुई जब मुंबई के एक शख्स ने अपने माता-पिता को अपनी सहमति के बिना जन्म देने पर कोर्ट में घसीटने का एलान किया. सैमुअल राफेल नाम के इस शख्स का मानना है कि उसके माता-पिता ने उसे सिर्फ अपनी खुशी के लिए जन्म दिया है.

अपने माता-पिता से किसी भी तरह की समस्या ना होने की बात करते हुए राफेल ने कहा, ”मैं अपने माता-पिता से प्यार करता हूं. हमारा रिश्ता बहुत ही अच्छा है. पर उन्होंने सिर्फ अपनी खुशी के लिए जन्म दिया है.”

राफेल ‘चाइल्ड फ्री’ के नाम से चल रही एक मुहिम का हिस्सा हैं. राफेल का मानना है कि इस दुनिया में बच्चों को जन्म नहीं दिया जाना चाहिए. माना जाता है कि राफेल जैसे लोगों द्वारा चलाई जा रही मुहिम धरती पर इंसानों के अस्तित्व के लिए खतरा बन सकती है.

निहिलानंद नाम का फेसबुक पेज चलाने वाले सैमुअल ने कहा, ”मैं चाहता हूं कि इस दुनिया में सभी का जन्म उनकी सहमति की बिना हुआ है और इस बात का एहसास उन्हें होना चाहिए.”
उन्होंने आगे कहा, ”हमारा सभी का जन्म माता-पिता के विवेक से होता है. उन्हें हमें जन्म देने में खुशी मिलती है. इसलिए वो हमें जन्म देते हैं.” सैमुअल का यह मानना है कि बच्चों को अपने माता-पिता के लिए कुछ नहीं करना चाहिए.

‘चाइल्ड फ्री’ इंडिया के नाम से भी चल रहा है एक ग्रुप

बेंगलुरु की प्रतिमा भी ‘चाइल्ड फ्री इंडिया’ नाम का फेसबुक पेज चला रही हैं. प्रतिमा किसी भी बच्चे को जन्म नहीं देना चाहती हैं. द प्रिंट की रिपोर्ट के मुताबिक प्रतिमा का मानना है, ”हम ऐसे ग्रुप का हिस्सा हैं जो कि बच्चों के जन्म नहीं होने में विश्वास रखता है. हम ‘चाइल्ड फ्री’ इंडियन्स हैं. हम ‘चाइल्ड फ्री’ के बारे में जागरूकता लाना चाहते हैं.”

मीडिया रिपोर्ट्स की मुताबिक इस तरह की मुहिम चलाने वाले लोगों का मानना है कि बच्चों को जन्म देना कुछ लोगों के लिए अच्छा हो सकता है, पर यह बात सभी पर लागू नहीं होती.

असल में इस तरह का ग्रुप बच्चों को जन्म देना नैतिक रूप से गलत मानता है. पर इस बहस के बढ़ने से धरती पर इंसानों के अस्तित्व पर ही सवाल खड़ा हो सकता है

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